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Jihadi Parinde Ashfaq Ahmad
Jihadi Parinde
Ashfaq Ahmad
कà¥à¤¯à¤¾ आपने आसपास कोई à¤à¤¸à¤¾ किरदार देखा है जो à¤à¤• तरह से सेकà¥à¤¸ बीमार हो। जिसके लिये कोई à¤à¥€, कैसी à¤à¥€ औरत à¤à¤• लजीज दोपà¥à¤¯à¤¾à¤œà¥‡ गोशà¥à¤¤ की हांडी से जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ और कà¥à¤› नहीं... औरत का हर अंग जिसमें à¤à¤• उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¨à¤¾ पैदा करता हो... कंसंटà¥à¤°à¥‡à¤Ÿ करते-करते जिसने अपनी कलà¥à¤ªà¤¨à¤¾à¤¯à¥‡à¤‚ इतनी जीवंत कर ली हों कि वह दà¥à¤¨à¤¿à¤¯à¤¾ की किसी à¤à¥€ लड़की औरत के साथ à¤à¤• आà¤à¤¾à¤¸à¥€ संसरà¥à¤— में à¤à¥€ वैसा ही मजा पा लेता हो जैसा कोई इंसान हकीकत के संसरà¥à¤— में पायेगा।
इस कहानी का किरदार à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ ही शखà¥à¤¸ दया शंकर दूबे है जो लखनऊ का रहने वाला à¤à¤• आम इंसान है लेकिन जिसकी उनà¥à¤®à¥à¤•à¥à¤¤ यौनेचà¥à¤›à¤¾à¤¯à¥‡à¤‚ उसे à¤à¤¸à¥€ साजिश के गहरे à¤à¤‚वर में फंसा देती हैं जहां से उसका निकलना लगà¤à¤— असंà¤à¤µ हो जाता है। लखनऊ से ले कर अमेरिका और योरप तक उसे वह सारा रोमांच, वह सारा सà¥à¤– मिलता है, जिसका वह à¤à¥‚खा था, जिसके लिये वह किसी à¤à¥€ हद तक जा सकता था, लेकिन यह सब उस परिणति की कीमत थी जिसकी देहरी पर अंततः उसे पहà¥à¤‚चना पड़ा।
à¤à¤• छोटी सी नौकरी से उसके नये जीवन का जो सिलसिला शà¥à¤°à¥‚ होता है वह पैसे और पà¥à¤°à¥‰à¤ªà¤°à¥à¤Ÿà¥€ के लिये बà¥à¤¨à¥€ गयी साजिश को पार करते हà¥à¤ उसे à¤à¤• जिहादी नेटवरà¥à¤• के साथ जोड़ कर अंततः मौत के गहरे कà¥à¤à¤‚ में धकेल कर ही ख़तà¥à¤® होता है।
हम हर शखà¥à¤¸ को नैतिकता के तराजू पर नहीं तौल सकते... कà¥à¤› लोगों के लिये इसकी कोई वरà¥à¤œà¤¨à¤¾ नहीं होती, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ वह सब ही आकरà¥à¤·à¤¿à¤¤ करता है जो अनैतिक हो, अतिवाद हो, अपरिमारà¥à¤œà¤¿à¤¤ हो... दया शंकर दूबे à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ ही शखà¥à¤¸ था।
| Media | Books Paperback Book (Book with soft cover and glued back) |
| Released | June 22, 2019 |
| ISBN13 | 9781645876854 |
| Publishers | Notion Press |
| Pages | 204 |
| Dimensions | 140 × 216 × 12 mm · 263 g |
| Language | Hindi |
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